शहादत की लज़्ज़त

〽️दुनिया की बेशुमार नेअमतों से इंसान लुत्फ व लज़्ज़त हासिल करता है, किसी नेअमत को खाता है, किसी को पीता है, किसी को सूंघता है, किसी को देखता है, किसी को सुनता है और इन के अलावा मुख़्तलिफ तरीक़ों से तमाम नेअमतों को इस्तेमाल करता है और उन से महज़ूज़ होता है लेकिन मर्दे मोमिन को शहादत की जो लज़्ज़त हासिल ...

मिस्र की औरतें

〽️मिस्र के शरीफ घर की औरतों ने जब जुलैख़ा को हज़रत यूसुफ अलैहिस्सलाम की मुहब्बत पर मलामत की और ताना दिया तो जुलैख़ा ने उन औरतों को बुलाया, उन के लिये दस्तर ख़्वान बिछवाया जिस पर तरह-तरह के खाने और मेवे चुने गए फिर जुलैख़ा ने हर औरत को फल वगैरा काटने के लिये एक-एक छुरी दी और हज़रत यूसुफ अलैहिस्सलाम ...

शहीद और ऐहसासे ज़ख़्म

〽️मैदाने जंग में शहीद हर तरह से ज़ख़्मी होता है कभी हाथ कटता है, कभी पांव घायल होता है, कभी उस के सीने में नेज़ा दाखिल किया जाता है, ख़ून का फव्वारा जारी होता है, कभी गर्दन कट के अलग हो जाती है और शहीद ख़ून में नहा कर ज़मीन पर गिर जाता है जिस से बज़ाहिर यह मालूम होता है कि उस को सख़्त तक्लीफ व अज़िय्यत ...

शुहदा के फज़ाइल

〽️खुदाए अज़्ज़ व जल्ल शुहदा_ए_किराम की फज़ीलत बयान करते हुए क़ुरआने मजीद में इरशाद फरमाता है: व ला तक़ुलू लि मै युक़ुतलु फी सबीलिल्लाही अम्वात बल अहया औं व लाकिल्ला तश्ऊरून जो ख़ुदा की राह में क़ल्त किये जाएं उन्हें मुर्दा मत कहना बल्कि वह ज़िंदा हैं लेकिन तुम्हें ख़बर नहीं। #(क़ुरआन करीम, पारा-2, रुकू-3) और ...

शहीद की किस्में

शहीद की तीन किस्में हैं: 1- शहीदे हकीक़ी 2- शहीदे फिक़्ही और 3- शहीदे हुक्मी जो अल्लाह की राह में क़त्ल किया जाए वह शहीदे हकीक़ी है और शहीदे फिक़्ही उसे कहते हैं कि आकिल बालिग़ मुसलमान जिसपर ग़ुस्ल फर्ज़ न हो वह तलवार व बंदूक वगैरा आलए जारिहा से ज़ुल्मन क़त्ल किया जाए और क़त्ल के सबब माल न वाजिब हुआ हो ...